वैसे तो दुनिया बहुत बड़ी है, और इस दुनिया मे लोग भी बहुत है, जिंदगी की इस कश्मकश में न जाने हम रोज़ कितने चेहरो से मशरूफ होते है, कितने की कहानियों से रूबरू और जाने या अनजाने में इन्ही किसी कहानी का हिस्सा भी बन जाते है। मुझे ऐसा लग रहा था अन्जाने में दुनिया की इस भीड़ में मैं खुद की वजूद को भी नजरअंदाज करते जा रहा हु। खुद की अस्तित्व से जुदा हो रहा हु, इस दुनिया की कशमकश में फसते जा रहा हु। लेकिन फिर एक दिन अंधेरे में मुलाकात मेरी मुलाकात हुई खुद से मैं हैरान था इसे देख कर यह पहली दफा थी जब मैं अपने आप को इतने करीब से देख रहा था अपने वजूद को महसूस कर पा रहा था अपने ही असली चेहरे से वाकिब हो रहा था। मेरी खुद की दुनिया इतनी खूबसूरत थी कि मैं इसे शब्दो मे जाहिर नही कर सकता उस दिन मुझे अपने आप से मिल कर लगा सारी दुनिया की खूबसूरती मेरे अंदर है और मैं इसके लिए कहा भटक रहा था।
तब जाके मुझे पता चला किसी और से या दुनिया वालो से मिलने से पहले हमें खुद से मिलना बहुत जरूरी है।
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