Monday, December 10, 2018

जुनून

कुछ करने का मन मे अगर जुनून सवार है,
तो फिर किस चीज़ का तुम्हे इंतेज़ार है,

सही वक्त न कभी आया था ना आएगा,
तुम्हे कुछ कर के दिखाना इस बार है।

‌अपने दम पे तू  दुनिया हिला दे,
भीड़ से अलग कुछ ऐसा कर के दिखा दे,

काम ऐसा कर के मुकाम बन जाये,
सूरज से ऊंचा तेरा नाम बन जाये,

असली खुशी तो तब होगी जब मां-बाप को आराम दे सके,
हज़ारो को अपने दम पर काम दे सके,

करोड़ो के बीच मे तू मिसाल बन जायेगा,
तेरे एक आवाज़ से हिंदुस्तान हिल जाएगा,

गिर गया जो एक बार तो उठ के दिखाना दो बार तुम,
मिलेगी सफलता कभी न कभी कोशिश करना बार बार तुम।

जो चाहे पा जाएगा तू

जो चाहे पा जाएगा तू,
1% में आ जायेगा तो,
लड़ अपने सपनो के लिए दिन रात,
एक दिन दुनिया मे छा जाएगा तू।

ना सोच आसानी से मिल जाएगी मंज़िल,
डटे रह राह पे सब मिल जाएगा बस है थोड़ी सी मुश्किल,

लड़ अपने सपनो के लिए जब वो पार्टी रात करे,
कर के दिखा कुछ ऐसा के वो तेरे बारे में बात करे,

ना डर कठिनाइयों से सफलता की इस राह में,
तभी तो बेटा आएगा तु इस दुनिया की निगाह में,

जितना दर्द सहा तूने सबका पे-ऑफ पायेगा तू,
उस दिन फक्र होगा अपने आप पर जब लेम्बो में आफिस जाएगा तू,

ना करता ये सब तो बैठ के रोता किसी कोने में,
एक टाइम खाने के लिए दर-दर भटकता,नींद न आती सोने में,
सोच - सोच कर सिर पटकता ,
ना मज़ा आता जीने में,

पहले न थी कुछ खाने को, अब जो चाहे खा पायेगा तू,
दिल से खुशी होगी जब अपने दम पर हज़ारो को खिलायेगा तू,

कर मेहनत तू दिन-रात मिलेगा ऐसा मुकाम तुझे,
जब आएगा एवेंटाडोर से आवाम करेगा सलाम तुझे।

धर्म की आड़ में

इंसानो को इंसान ने हैवान बना दिया,
कुछ दलालो को लोगो ने भगवान बना दिया।

बन के दलाल भगवान के लूट रहे खजाने को,
मंदिर के बाहर हज़ारो तरस रहे खाने को।

धर्म की आड़ में ना ऐसा गंदा काम करो,
अपने फायदे के लिए धर्म को ना बदनाम करो।

दान उसको करो जो किसी के काम आ जाये,
जैसे इंसानियत के रूप में भगवान का पैगाम आ जाये।

गुज़ारिश है सबसे कुछ जरूरतमंदों का सहारा बने,
भूखा पेट न सोये कोई ऐसा हिंदुस्तान हमारा बने।

वक़्त मिले तो मिल लेना कभी खुद से

वैसे तो दुनिया बहुत बड़ी है, और इस दुनिया मे लोग भी बहुत है, जिंदगी की इस कश्मकश में न जाने हम रोज़ कितने चेहरो से मशरूफ होते है, कितने की कहानियों से रूबरू और जाने या अनजाने में इन्ही किसी कहानी का हिस्सा भी बन जाते है। मुझे ऐसा लग रहा था अन्जाने में दुनिया की इस भीड़ में मैं खुद की वजूद को भी नजरअंदाज करते जा रहा हु। खुद की अस्तित्व से जुदा हो रहा हु, इस दुनिया की कशमकश में फसते जा रहा हु। लेकिन फिर एक दिन अंधेरे में मुलाकात मेरी मुलाकात हुई खुद से मैं हैरान था इसे देख कर यह पहली दफा थी जब मैं अपने आप को इतने करीब से देख रहा था अपने वजूद को महसूस कर पा रहा था अपने ही असली चेहरे से वाकिब हो रहा था। मेरी खुद की दुनिया इतनी खूबसूरत थी कि मैं इसे शब्दो मे जाहिर नही कर सकता उस दिन मुझे अपने आप से मिल कर लगा सारी दुनिया की खूबसूरती मेरे अंदर है और मैं इसके लिए कहा भटक रहा था।

तब जाके मुझे पता चला किसी और से या दुनिया वालो से मिलने से पहले हमें खुद से मिलना बहुत जरूरी है।